कामागाटामारू प्रकरण। Komagata Maru 1914

कामागाटामारू प्रकरण। Komagata Maru 1914

कामागाटामारू प्रकरण 2014  के बारे में हमें जानकारी जेम्स कैम्पबेल की पुस्तक भारत में राजनीतिक व्याधि तथा सेडीशन कमेटी की रिपोर्ट द्वारा मिलती हैं।

1914 में कनाडा में भारतीयों के प्रवेश से संबंधित विवाद था। जिसमें कनाडा सरकार ने एक ऐसा अप्रवासी कानून बनाया। जिसके तहत वहीं भारतीय कनाडा में प्रवेश पा सकता था। जो कि सीधे भारत से आए हो। 

यह कानून अत्यधिक कठोर इसलिए था कि इस समय कोई ऐसा मार्ग नहीं था। जिससे भारतीय भारत से सीधे कनाडा पहुंच सके। 

नवंबर 1913 में कनाड़ाकी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे 35 भारतीयों को कनाडा में घुसने की अनुमति दे दी जो सीधे भारत से नहीं आए थे। जिसके परिणाम स्वरूप सिंगापुर में भारतीय ठेकेदार गुरुदत्त सिंह ने कामागाटामारू नाम का एक जहाज किराए पर लेकर दक्षिण पूर्व एशिया से करीब 376 यात्रियों को बैठाकर 4 मार्च 1914 ई0 को बैंकूवर की ओर प्रस्थान किया।

इस बीच कनाडा की सरकार ने इस कानून को रद्द कर दिया जिसके द्वारा 35 लोग कनाडा में प्रवेश पाए थे। 

जहाज के 23 मई 1914 को वेंकूवर तट पर पहुंचते ही कनाडाई पुलिस ने उसी घेराबंदी कर ली।  जहाज में फंसे यात्रियों के अधिकार की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से  हुसैन रहीम, बलवंत सिंह,  सोहनलाल पाठक, के नेतृत्व में एक शोर कमेटी ( तटीय समिति) बनाई गई। 

अमेरिका में भगवान सिंह,  बरकतउल्ला, रामचंद्र और सोहन सिंह के नेतृत्व में यात्रियों के पक्ष में आंदोलन चलाया गया लेकिन अंततः कामागाटामारू को कनाडा की जल सीमा से बाहर होना पड़ा।

इसके याकोहामा (जापान) पहुंचने के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया।  अंग्रेज सरकार ने जहाज को सीधे कोलकाता आने का आदेश दिया। 

27 सितंबर 1914 को जहाज के बजबज पहुंचने पर कुद्र यात्रिओं और पुलिस के मध्य संघर्ष हुआ जिसमें 18 यात्री मारे गए 202 को जेल पहुंचा दिया गया शेष भाग गए। 

2014 में भारत सरकार ने इस घटना की याद में ₹100 का सिक्का जारी किया। 

तोषामारु प्रकरण 1914

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में क्रांति का बिगुल बजाने के उद्देश्य गदर पार्टी के कुछ सदस्य तो तोषामारु जहाज से स्वदेश लौट रहे थे।  रास्ते में उनका जहाज सिंगापुर रुका वहीं पर ग़दर पार्टी के क्रांतिकारी भाई परमानंद के देश प्रेमी ओजस्वी भाषणों को सुनकर सिंगापुर लाइट इन्फेंट्री के जवानों ने डुंडे खां और जमादार चिश्ती खान के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया।  यह क्रांति सिंगापुर क्रांति के नाम से भी प्रसिद्ध रही जिसका बाद में अंग्रेज सैनिकों द्वारा दमन कर दिया गया। 

FAQ  कामागाटामारू प्रकरण। Komagata Maru 1914

Qus.  बजबज बंदरगाह कहाँ हैं ?
Ans: बजबज बंदरगाह कोलकाता में हैं।

Qus. शोर कमेटी के प्रमुख नेता कौन -कौन थे?
Ans: जहाज में फंसे यात्रियों के अधिकार की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से  हुसैन रहीम, बलवंत सिंह,  सोहनलाल पाठक, के नेतृत्व में एक शोर कमेटी ( तटीय समिति) बनाई गई। 

Qus: कामागाटामारू क्या हैं ?
Ans: कामागाटामारू  एक जहाज था जिसे बैंकूवर कनाड़ा जाने के लिए भारतीय ठेकेदार गुरुदत्त सिंह ने किराये पर लिया था।

Qus: सिंगापुर विद्रोह क्या हैं ?
Ans: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में क्रांति का बिगुल बजाने के उद्देश्य गदर पार्टी के कुछ सदस्य तो तोषामारु जहाज से स्वदेश लौट रहे थे।  रास्ते में उनका जहाज सिंगापुर रुका वहीं पर ग़दर पार्टी के क्रांतिकारी भाई परमानंद के देश प्रेमी ओजस्वी भाषणों को सुनकर सिंगापुर लाइट इन्फेंट्री के जवानों ने डुंडे खां और जमादार चिश्ती खान के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया।  यह क्रांति सिंगापुर क्रांति के नाम से भी प्रसिद्ध रही जिसका बाद में अंग्रेज सैनिकों द्वारा दमन कर दिया गया। 

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