भारतीय नागरिकता

Indian citizenship gk in hindi

0

नमस्कार दोस्तों , आप सभी का वेबसाइट GkOnWeb  पर स्वागत  ! 🙂

दोस्तों आप यह तो जानते ही है कि विभिन्न एक दिवसीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भारतीय राजव्यवस्था Indian polity एक महत्वपूर्ण विषय हैं।  जिससे काफी संख्या में प्रश्न विगत वर्षों में पूछे जाते रहे हैं। इसीलिए आज की हमारी यह पोस्ट इसी विषय से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण topic Indian citizenship gk in hindi से लिया गया है जो कि आपको आने वाले सभी प्रकार के Competitive Exams में  बहुत काम आयेंगी ! अतः आप सभी से Request है कि आप इस पोस्ट को अपने Browser के BOOKMARK में Save कर लीजिये, और Check करते रहियेगा ! क्योकिं इस पोस्ट को समय – समय  update किया जाता रहेगा तथा नए अध्यायों को जोड़ा जायेगा।🙂 🙂

Indian citizenship gk in hindi

Indian citizenship gk in hindi. भारतीय संविधान लागू होने के बाद 1955  में नागरिकता अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम के अनुसार भारतीय नागरिकता निम्न प्रकार से प्राप्त की जा सकती हैं।

  1. जन्म द्वारा 
  2. वंशाधिकार द्वारा 
  3. पंजीकरण द्वारा 
  4. देशीयकरण द्वारा 
  5. विदेशी भू -भाग के भारतीय क्षेत्र  मिल जाने से 

1. जन्म के द्वारा-

26 जनवरी 1950 के बाद भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक होगा। लेकिन 1986 के नागरिक संशोधन विधेयक में यह प्रावधान किया गया कि भारत के राज्य क्षेत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक तभी होगा जब उसके माता पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।

2. वंशाधिकार द्वारा –

26 जनवरी 1950 के बाद भारत के बाहर जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक माना जायेगा ; यदि जन्म के  समय उसके माता या पिता में कोई एक भारतीय हैं।

माता की नागरिकता  के आधार पर विदेश में जन्म लेने वाले व्यक्ति भी भारतीय होगा इसका प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 में किया गया। इसके पूर्व भारत से बाहर पैदा हुए बच्चे को केवल उसी दशा में भारत की नागरिकता प्राप्त होती थी जब उसका पिता भारतीय नागरिक हो।

3. पंजीकरण द्वारा –

यदि कोई व्यक्ति 5 वर्षो से अधिक समय से भारत में रह रहा हो और भारत की नागरिकता पाना चाहता हो तो वह सक्षम अधिकारी के सामने नागरिकता पाने के लिए पंजीकरण करा सकता हैं।

याद रखे – नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1986 के पहले उपर्युक्त निवास करने की अवधि मात्र 6 माह थी।

4. देशीयकरण द्वारा –

यदि कोई व्यक्ति अपने देश की नागरिकता छोड़ चुका हो तथा  भारत  लगातार 12 वर्षो से रह रहा हो और वह राज्य निष्ट एवं अच्छे चरित्र का हो तो भारत सरकार को  आवेदन देकर भारत का नागरिक बन सकता हैं।

5. विदेशी भू -भाग के भारतीय क्षेत्र  मिल जाने से-

यदि किसी नए भूभाग को भारतीय क्षेत्र  शामिल किया जाता हैं तो उस क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों को भारत की नागरिकता स्वत: ही मिल जाती हैं।


 विदेशी निवासियों के लिए भारतीय नागरिकता

  • भारतीय मूल के नागरिकों को दोहरी नागरिकता की सिफारिश लक्ष्मीमल सिंघवी समिति ने की थी।
  • नागरिकता संशोधन विधेयक अधिनियम, 2003 द्वारा 16 देशों  भारतीय मूल के नागरिकों के लिए विदेशी भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।
  • वे 16 देश निम्नानुसार थे- स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, कनाड़ा, स्वीड़न, फ़्रांस, पुर्तगाल, न्यूजीलैंड, यूनान, साइप्रस, इटली, फिनलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड, ब्रिटैन, अमेरिका 

विदेशों बसे भारतीय मूल के व्यक्तियों की तीन श्रेणियां हैं –

  1. अनिवासी भारतीय|Non-Resident Indian (NRIs)
  2. भारतीय मूल के व्यक्ति|Person of Indian Origin (PIO) 
  3. भारत  के सीमापारीय नागरिक|Overseas Citizen of India (OCI)  

1. अनिवासी भारतीय (NRIs)-

  • ऐसे भारतीय नागरिक जो नौकरी या व्यवसाय के उद्देश्य से वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक दिनों के लिए विदेशों में रहते हैं तथा जिनके पास भारतीय पासपोर्ट होता हैं; वे अनिवासी भारतीय कहलाते हैं।
  • अनिवासी भारतीयों को पहले आम चुनाव में मत डालने का अधिकार नहीं था, परन्तु 2011 में भारत सरकार द्वारा उन्हें मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने का अधिकार प्रदान कर दिया गया।
  • याद रखे – भारत सरकार द्वारा विदेशों में नियुक्त किये गए व्यक्तियों को भी अनिवासी भारतीय नागरिक का दर्जा प्राप्त होता हैं।

2. भारतीय मूल के व्यक्ति (PIOs)-

  •  ऐसे व्यक्ति जो स्वयं कभी भारतीय नागरिक रहा हो या उसके पूर्वज कभी भारतीय नागरिक रहे हो। उन्हें भारतीय मूल का व्यक्ति माना जाता हैं।
  • याद रखे- पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, बंगलादेश, चीन और श्रीलंका के नागरिक भारतीय मूल के व्यक्तियों में शामिल नहीं होते हैं।

3. भारत के सीमापारीय नागरिक(OCIs)-

  • भारतीय मूल के सभी विदेशी नागरिक, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2005 के अनुसार दोहरी नागरिकता ग्रहण कर सकते हैं;यदि उनका गृह देश का कानून  इसकी अनुमति देता है तो।
  • बांग्लादेश और पाकिस्तान के भारतीय मूल के व्यक्ति को इस प्रकार की दोहरी नागरिकता नहीं मिल सकती हैं।
  • याद रखे – PIOs और OCIs नागरिकों को भारत में कृषि की जमीन खरीदने, राजनीतिक और आधिकारिक पद ग्रहण करने का अधिकार नहीं होगा। लेकिन वे भारत में रहकर व्यवसाय कर सकते हैं।

अन्य स्मरणीय तथ्य

  • भारत में मताधिकार प्राप्त हैं केवल -NRIs को 
  • भारत में आने के लिए वीजा की आवश्यकता होती हैं -PIOs को 

Share:

नई पोस्ट

टॉपिक चुने

error: Content is protected !!