भारतीय संसद Parliament of india hindi

Parliament of india hindi भारतीय संसद

  • भारतीय संसद राष्ट्रपति,राज्य सभा और लोक सभा से मिलकर बनती हैं।
  • संसद के उपरी सदन को राज्य सभा तथा निचले सदन को लोकसभा कहते हैं।
  • लोक सभा में जनता का प्रतिनिधित्व होता हैं जबकि राज्य सभा में भारत संघ के राज्यों का प्रतिनिधित्व होता हैं।

लोकसभा

  • लोकसभा में अधिक से अधिक 552 सदस्य हो सकते हैं। जिनमें राज्यों के प्रतिनिधि 530 तथा संघ राज्य के क्षेत्रों प्रतिनिधि 20 से अधिक नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त एंग्लो – इंडियन समुदाय में से दो व्यक्तियों को राष्ट्रपति चुनता हैं।
  • लोकसभा सदस्यों का निर्वाचन व्यस्क(18 वर्ष से अधिक आयु) मताधिकार के आधार पर किया जाता हैं।
  • लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्ष होता हैं लेकिन इससे पूर्व भी इसका विघटन हो सकता हैं।
  • आपातकाल की स्थिति में लोकसभा का कार्यकाल एक बार में एक वर्ष बढ़ाया जा सकता हैं तथा आपात काल न रहने की स्थिति में यह अवधि 6 माह से अधिक नहीं बढाई जा सकती हैं।
  • लोकसभा के उम्मीदवार के लिए आयु 25 वर्ष से कम नहीं होने चाहिए जबकि राज्य सभा के लिए यह सीमा 30 वर्ष हैं।
  • एक समय में व्यक्ति केवल एक ही सदन का सदस्य हो सकता हैं।
  • संसद की किसी सदस्य की योग्यता या अयोग्यता से सम्बंधित निर्णय चुनाव आयोग के परामर्श से राष्ट्रपति करता हैं।
  • यदि कोई संसद सदस्य बिना सदन की अनुमति से 60 दिनों से अधिक अवधि के लिए अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता हैं तो सदन उसकी सदस्यता भंग कर सकता है।
  • लोकसभा के निर्वाचन के बाद निर्वाचित सदस्य प्रथम बैठक जिसकी अध्यक्षता लोकसभा सदस्यों में से सबसे वरिष्ठ सदस्य करता है। उसमे लोकसभा अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुन लेती हैं।
  • यह अध्यक्ष दूसरी नव निर्वाचित लोकसभा की प्रथम बैठक तक अपने पद पर रहता है।
  • यदि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष लोकसभा के सदस्य नहीं रहते तो वो अपना पद त्याग देते है। लोकसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष को अपना त्याग पत्र दे देते हैं।
  • किसी भी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को उस लोकसभा के सदस्य बहुमत से उन्हें हटा सकते है इसके लिए उन्हें लोकसभा को 14 दिन पूर्व सूचना देनी आवश्यक हैं। साथ ही अध्यक्ष को निर्णायक मत देने भी अधिकार हैं।
  • लोकसभा और राज्य सभा के सयुंक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष करता हैं। उसकी अनुपस्थिति में लोकसभा का उपाध्यक् , लोकसभा उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में राज्य सभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है और यदि उपसभापति भी अनुपस्थित है तो फिर बैठक में उपस्थित सदस्यों में से चुना हुआ सदस्य सयुंक्त अधिवेशन की अध्यक्षता करता हैं।
  • कोई विधेयक धन विधेयक हैं इसका निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है और उसका निर्णय अंतिम होता है।
  • धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रारंभ किये जा सकते है जबकि साधारण विधेयक तथा संविधान संशोधन विधेयक किसी भी सदन में प्रारंभ किये जा सकते है।
  • धन विधेयक में राज्य सभा कोई भी संशोधन नहीं कर सकती है।
  • धन विधेयक को राज्य सभा 14 दिन में अपनी सिफारिशों के साथ वापस कर देती है जबकि अन्य विधेयक को अधिकतम 6 मास तक रोक सकती है|
  • यदि किसी विधेयक पर दोनों सदनों को मतभेद हो तो राष्ट्रपति दोनों सदनों का सयुंक्त अधिवेशन आयोजित करता है।
  • धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 110 में वर्णित है।
  • संसद राज्य सूचि की किसी विषय पर तभी विधि का निर्माण कर सकती है जब राज्य सभा में उपस्थित और मतदान देने वाले 2/3 सदस्य उस विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर दे।
  • लोक सभा में केवल अ.जा. और ज.जा. को ही आरक्षण दिया गया है किसी अन्य को नहीं।

राज्यसभा

  • राज्य सभा में 250 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते| राज्यसभा में 238 सदस्य राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्रों से  और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किये जाते है।
  • राष्ट्रपति द्वारा नामित 12 व्यक्ति साहित्य,विज्ञान ,कला,खेल और अन्य सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले होते है।
  • भारत में राज्यों को राज्य सभा में समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया हैं।
  • प्रत्येक राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय में द्वारा राज्य सभा के लिए अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन किया जाता हैं।
  • राज्य सभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता हैं।
  • राज्य सभा को कभी भंग नहीं किया जा सकता हैं।
  • किसी भी संसद के सदस्य को अधिवेशन के समय या समिति, जिसका कि वो सदस्य हैं की बैठक/अधिवेशन के समय या पूर्व या पश्चात 40 दिन की अवधि के दौरान गिरफ़्तारी से छुट दी गई है।
  • संसद सदस्यों की  गिरफ्तारी में यह छूट केवल सिविल मामलों में हैं।
  • राज्य सभा, सभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से यह संकल्प पारित करे कि संघ एवं राज्यों के हित के लिए किसी नई अखिल भारतीय सर्विस के सृजन की आवश्यकता हैं, तो नई अखिल भारतीय सर्विस का सृजन किया जा सकता हैं।

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