भारत में यूरोपियन कंपनियों का आगमन 

भारत में यूरोपियन कंपनियों का आगमन 

भारत में यूरोपियन कंपनियों का आगमन 15 शताब्दी के उत्तरार्ध में शुरू हो गया था। यूरोपियन कम्पनियों का भारत आगमन का क्रम निम्नानुसार हैं –

कंपनी आगमन वर्ष 
पुर्तगाल  1498 ई.
अंगेज  1600 ई.
डच  1602 ई.
डेनिस  1616 ई.
फ्रांसीसी 1664 ई.
स्वीडिश  1731 ई.

पुर्तगाली 

  • प्रथम पुर्तगाली व्यक्ति वास्कोडिगामा था जो गुजराती पथ प्रदर्शक अब्दुल मनीद की सहायता से 90 दिनों की समुद्री यात्रा के बाद 17 मई 1498 ई. में कालीकट (केरल) बंदरगाह पर उतरा। यहाँ पर उसका स्वागत हिन्दू राजा जमोरिन ने किया।
  • पेड्रो अल्ब्रेज केब्राल दूसरा पुर्तगाली था जो 31 दिसंबर 1500 ई. को भारत आया।
  • फ्रांसिस्को-डी-अल्मीडा(1505-1509 ई.) प्रथम पुर्तगाली गवर्नर के रूप में 1505ई. में भारत आया। उसने भारत में शांत जल की नीति (blue water policy) को अपनाया
  • भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक अल्फ़ान्सो डी अलबुर्क को माना जाता हैं जो 1509 में दूसरा पुर्तगाली गवर्नर जनरल बनकर भारत आया।
  • अल्फ़ान्सो डी अलबुर्क ने कोचीन को अपना मुख्यालय बनाया तथा 1510ई. में उसने गोवा को बीजापुर के शासक युसूफ आदिलशाह से छीन लिया।
  • 1530 ई. पुर्तगाली गवर्नर नीनू डी कुन्हा ने कोचीन की जगह गोवा को अपनी राजधानी बनाया।
  • पुर्तगाली गवर्नर अल्फ़ान्सो डिसूजा के साथ प्रसिद्ध संत फ्रांसिस्को जेवियर भारत आये थे।
  • पुर्तगाली गवर्नर अल्फ़ान्सो डिसूजा ने सैनथोमा (मद्रास), हुगली(बंगाल), कठियावाड में अपनी बस्तियां स्थापित की।
  • पुर्तगालियों ने तम्बाकू की खेती को भारतवासियों को सबसे पहले अवगत कराया था
  • भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस (1556 ई.) में पुर्तगालियों ने गोवा में स्थापित की
  • पुर्तगालियों ने भारत में गोथिक स्थापत्य कला का प्रचलन किया।
  • पुर्तगालियों ने कार्टज -आर्मेडा पद्धति पर जहाजों के अरब सागर में प्रवेश को नियंत्रित किया।
  • पुर्तगालियों ने 1503ई. में कोचीन में (केरल) में अपनी पहली तथा 1505 ई. में कन्नूर में अपनी दूसरी फेक्ट्री स्थापित की।

डच (हालैंड निवासी)

  • डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना डच संसद द्वारा 1602 ई. में की गई।
  • पहला डच यात्री कोर्नेलियन हाउटमैंन था जो 1596 ई. में भारत पहुंचा।
  • डच नौसेना नायक वादेर हेग ने 1605 ई. ने मसुलीपट्टनम में प्रथम डच कारखाना तथा पेत्तोपोली (निजामपट्टनम) में दूसरा कारखाना स्थापित किया गया।
  • डचों द्वारा स्थापित कुछ अन्य कारखानों में पुलीकट(1610 ई.), सूरत(1616 ई.), कारिकल (1645 ई.), चिनसुरा (1645 ई.) स्थापित किये गए।
  • पुलीकट के डच कारखाने को गेल्ड्रिया का किला तथा चिनसुरा (हुगली) को गुस्तावुस फोर्ट कहा गया।
  • डचों ने पुलीकट में (मुख्यालय) में स्वर्ण के सिक्के पैगोडा का प्रचलन करवाया।
  • 1789 ई. अंग्रेजों ने डच को बेदरा( पं0 बंगाल) के युद्ध में पराजित कर दिया जिसके बाद उनका भारत में व्यापारिक हस्तक्षेप बंद हो गया।

फ्रांसीसी

  • फ़्रांस के सम्राट लुई (14 वें) के मंत्री कोलबर्ट ने 1664 ई. फ्रेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की।
  • फ्रांसिस कैरों ने 1668 ई. में सूरत में अपना प्रथम व्यापारिक कारखाना खोला। तथा दूसरा कारखाना मसूलीपट्टनम में खोला।
  • 1673 ई. में फ्रांसिस मार्टिन ने पुदुर्चेरी नामक गाँव प्राप्त किया, जो आगे चलकर पांडिचेरी के नाम से जाना गया।
  • फ्रांसीसियों के बंगाल में मुख्य फैक्ट्री चन्द्रनगर में थी।
  • डचों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया लेकिन बाद में उनके बीच रिजविक की संधि के बाद पांडिचेरी पुनः फ्रांसीसियों को मिल गया।
  • फ्रांसीसियों ने 1721 में मॉरीशस, 1724 ई. में मालाबार में स्थित माही तथा 1739 ई. कारिकाल पर अधिकार कर लिया।
  • 1742 ई. डूप्ले गवर्नर बना जो की भारत में फ्रांसीसी साम्राज्य स्थापित करना चाहता था।
  • अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच तीन युद्ध हुए जो कर्नाटक के क्षेत्र में लड़ें गए।
  • उनके बीच 22 जनवरी 1760 ई. लड़ें गए वांडीवाश के युद्ध ने जिसमे अंग्रेज सेना का नेतृत्व जनरल आयरकूट ने किया था उसमें फ्रांसीसियों की हार हुई और इसी के साथ ही उनका भारत में साम्राज्य स्थापित करने का सपना समाप्त हो गया।

यूरोपियों की प्रथम फैक्ट्रियां 

पुर्तगाली  कोचीन (केरल, 1503 ई.)
डच  मसूलीपट्टनम ( आन्ध्र प्रदेश, 1605 ई.)
अंग्रेज  मसूलीपट्टनम ( आन्ध्र प्रदेश, 1611 ई.)
डेनिस  ट्रावनकोर (तंजौर, 1620 ई. )
फ्रांसीसी सूरत  (गुजरात, 1668 ई.)

अंग्रेज 

  • इंग्लैण्ड के मर्चेंट एडवेंचर्स  नामक व्यापारियों के एक समूह ने दि गवर्नर एण्ड मर्चेंट्स ऑफ़ लंदन ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज की स्थापना 1599 ई. में की।
  • महारानी एलिजाबेथ ने 1600 ई. में कंपनी को पूर्व के साथ व्यापार करने के लिए 15 वर्षो के लिए अधिकार पत्र प्रदान किया।
  • इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में कैप्टन हाकिंस, हैक्टर नामक जहाज से सूरत आया।
  • जब हाकिंस जहाँगीर के दरबार में पहुंचा तो उसने बादशाह से फारसी में बात की जिससे प्रसन्न होकर बादशाह ने उसे 400 मनसब का ओहदा दिया तथा इंग्लिश खां की उपाधि दी।
  • अंग्रेजों ने अपनी पहली फैक्ट्री 1611 ई. में मसूलीपट्टनम में खोली।
  • अंग्रेजो ने जहाँगीर से अनुमति लेकर दूसरी फैक्ट्री सूरत में खोली।
  • इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में सर टामस रो 18 सितम्बर 1615 ई. में भारत आया जिसने 10 जनवरी 1616 को अजमेर में जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ।
  • अंग्रेजों ने पूर्वी तट पर 1632 ई. बालासौर और हरिहरपुर में स्थापित किया।
  • फ्रांसिस डे नामक एक अंग्रेज ने 1639 ई. में चंद्रगिरी के राजा से मद्रास पट्टे पर प्राप्त किया और वहां सेंट जार्ज फोर्ट की स्थापना की।
  •  1651 ई. में ब्रिजमैन ने हुगली में एक कारखाने की स्थपाना की।
  • बंगाल के सूबेदार शाह्शुजा को ने 1651 ई. में अंग्रेजों को व्यापार करने का विशेष अधिकार दे दिया।
  • 1661 ई. पुर्तगालियों ने अपनी राजकुमारी कैथरीन ब्रेगान्जा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय से करके बम्बई उनको दहेज़ के रूप में दे दिया।
  • 1669-1677 ई. तक बम्बई के गवर्नर रहने वाले जेराल्ड आगयिर को ही बम्बई का वास्तविक संस्थापक माना जाता हैं।
  • जाब चारनाक ने बंगाल में तीन गाँव कालिकाता, गोविंदपुर और सुतानाटी को मिलकर आधुनिक कलकत्ता के नीव रक्खी तथा फोर्ट विलियम का निर्माण किया। इसका पहला प्रेसिडेंट सर चार्ल्स आयर था।

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