मुगल साम्राज्य का पतन

मुगल साम्राज्य का पतन

 Decline of the Mughal Empire in Hindi.अहमदनगर में 3 मार्च 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके तीनों पुत्रों मुअज्जम, आजम और कामबख्श  में सत्ता के लिए संघर्ष हुआ। इसमें मुअज्जम ने लाहौर के निकट बहादुरशाह के नाम से अपना राज्याभिषेक करा लिया।

मुअज्जम ने सत्ता के इस संघर्ष में कराय और जजाऊ के निकट युद्ध में आजम को तथा बीजापुर के युद्ध में कामबख्श को मार डाला और दिल्ली की तख़्त पर बैठ गया।

बहादुरशाह प्रथम(1707-12 ई.) 

  • बहादुर शाह प्रथम 65 वर्ष की आयु में मुगल सम्राट बना।
  • बहादुर शाह प्रथम ने राजपूतों तथा मराठों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध रक्खे। इसने शम्भाजी के पुत्र शाहू को मुग़ल कैद से आजाद कर दिया।
  • इतिहासकार खाफी खां ने बहादुर शाह को शाह-ए-बेखबर का उपनाम दिया।
  • जोसुआ केटेलार के नेतृत्व में बहादुरशाह के दरबार में एक डच प्रतिनिधि मंडल आया था।

जहाँदारशाह(1712-13 ई.) 

  • जहाँदार शाह, जुल्फिकार खां के सहयोग से दिल्ली की गद्दी पर बैठा और उसे अपना वजीर बनाया।
  • जहाँदार शाह ने जजिया बंद कर दिया।
  • जहाँदार शाह के शासन काल में उसकी प्रेमिका लाल कुंवर का बहुत अधिक दखल था।इसी वजह से उसे लोग लापरवाह या लंपट मुर्ख कहते थे।
  • जहाँदार शाह ने आमेर के राजा जयसिंह को मिर्जा की उपाधि देकर मालवा का सूबेदार बनाया तथा मारवाड़ के राजा अजीतसिंह को महाराजा की उपाधि देकर गुजरात का सूबेदार बनाया था।
  • अजीम-उस-शान के पुत्र फरूखसियर ने सैयद भाइयों की मदद से 11 फरवरी 1713 को उसकी हत्या कर दी।

फरूखसियर(1713-19 ई.) 

  • फरूखसियर, सैयद बंधुओं के सहयोग से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  • सैयद भाई – अब्दुल्ला खां और हुसैन अली खां को नृप निर्माता (किंगमेकर) के नाम से जाना जाता हैं।
  • फरूखसियर के शासन काल में ही सिक्ख नेता बंदा बहादुर को फांसी दी गई।
  • फरूखसियर के शासन काल ईस्ट इंडिया कंपनी के एक दल जानशोरमन के नेतृत्व में भारत आया जिसमे एक शल्य चिकित्सक हैमिल्टन भी था, जिसके इलाज से फरूखसियर को बहुत फायदा हुआ और फरूखसियर ने ईस्ट इंडिया कम्पनी के लिए व्यापारिक लाभ का एक शाही फरमान जारी कर दिया, जिसे कंपनी का मैग्नाकार्टा कहा गया।
  • फरूखसियर, सैयद भाइयों के बंधन से मुक्त होना चाहता था लेकिन सैयद भाइयों ने पेशवा बालाजी विश्वनाथ के साथ संधि कर फरूखसियर को अँधा कर मरवा दिया।
  • इसके बाद सैयद भाइयों ने रफ़ी-उर-दरजात को मुग़ल बादशाह बनाया, जो सबसे कम समय तक शासन करने वाला मुगल बादशाह रहा। (28 फरवरी से 4 जून 1719 ई. तक)
  • रफ़ी-उर-दरजात की मृत्यु के बाद; रफिउदौला को शाहजहाँ द्वितीय की उपाधि देकर मुग़ल बादशाह बनाया गया।  इसका शासन 6 जून 1719 ई से लेकर 17 सितम्बर 1719 तक रहा।
  • यह बहुत ही दुर्बल और कायर व्यक्ति था; इसीलिए इसे घ्रणित कायर कहा गया।

मोहम्मद शाह (1719-48 ई.)

  • मोहम्मद शाह ने 1720 ई. में जजिया अंतिम रूप से समाप्त कर दिया।
  • मोहम्मद शाह ने निजामुलमुल्क के सहयोग से 1722 ई. सैय्यद भाइयों की हत्या करवा दी।
  • इसके शासन काल में ही निजामुलमुल्क चिनकिलिज खां ने हैदराबाद में स्वतंत्र आसफजाही वंश की नीव रक्खी।
  • मोहम्मद शाह के शासन काल में ही फारस के शासक नादिरशाह ने 1739 ई. में भारत पर आक्रमण किया।
  • 13 फरवरी 1739 ई. में नादिरशाह ने करनाल के युद्ध में मोहम्मद शाह को पराजित कर दिया।
  • नादिरशाह ने भारत पर यह आक्रमण अवध की नवाब सआदत खां के उकसाने पर किया था।जब नादिरशाह ने उससे धन माँगा तो उसने लाचार होकर विष खाकर अपनी जान दे दी।
  • मोहम्मद शाह को उसके विलासिता पूर्ण आचरण के कारण उसे रंगीला कहा गया|
  • नादिरशाह का मुख्य उद्देश्य धन लूटना था। वह अपने साथ कोहिनूर हीरा व तख्ते ताउस (मयूर सिंहासन ) फारस ले गया।
  • मोहम्मद शाह के शासन काल में कुछ स्वतंत्र राज्यों की स्थापना हुई जो निम्न प्रकार हैं –
राज्य  संस्थापक 
अवध  सआदत खां
बंगाल  मुर्शीद कुली खां
भरतपुर-मथुरा  बदन सिंह
गंगा यमुना दोआब  रूहेल
फर्रुखाबाद बंगश नवाब
हैदराबाद निजामुलमुल्क

अहमदशाह (1748-54ई.)

  • अहमदशाह ने अवध के सूबेदार सफदरजंग को अपना वजीर नियुक्त किया।
  • इसके शासन काल में अहमद शाह अब्दाली ने भारत पर आक्रमण किया। इसने कुल 7 बार भारत पर आक्रमण किया।
  • अहमदशाह अब्दाली को दुर्रे दुर्रानी (युग का मोती) कहा जाता था।

आलमगीर द्वितीय(1754-1759ई.)

वजीर इमाद की मदद से अहमदशाह को अपदस्थ कर जहांदार का पुत्र अजीजुद्दीन, आलमगीर द्वितीय की उपाधि धारण कर मुग़ल बादशाह बना।

शाह आलम  द्वितीय(1754-1759ई.) 

  • शाहआलम द्वितीय के शासन काल में बक्सर का युद्ध (1764 ) में हुआ। जिसमें एक ओर अंगेरजी सेना का नेतृत्व हेक्टर मुनरों ने तथा दूसरी और मुग़ल सेना, अवध का नवाब शुजाउद्दौला तथा बंगाल के अपदस्थ नवाब मीर कासिम के संयुक्त सेनाओं के बीच हुआ जिसे अंग्रेज विजयी रहे।
  • बक्सर के युद्ध में पराजय के बादशाहआलम द्वितीय बंगाल के गवर्नर राबर्ट क्लाइव के साथ इलाहबाद की संधि करनी पड़ी और शाहआलम 1765-1772 ई. तक अंग्रेजो के सरंक्षण में इलाहबाद में रहा।
  • 1772 ई. में मराठा सरदार महादजी सिंधियां ने शाहआलम को पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठा दिया।
  • शाहआलम के समय में 1761 ई. में मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच पानीपत की तीसरी लड़ाई हुई जिसमे मराठों की हार हुई।
  • शाहआलम द्वितीय का मूल नाम अली गौहर था।
  • 1803ई. में जनरल लेक ने दौलत राव सिंधियां को पराजित कर पुनः दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया था।

अकबर द्वितीय( 1806-1837 ई.)

  • यह अंग्रेजी संरक्षण में शासक बनने वाला प्रथम मुगल बादशाह था।
  • इसने ही राजा राम मोहन राय को राजा की उपाधि प्रदान की।

बहादुरशाह द्वितीय(1837-58ई.)

  • यह अंतिम मुग़ल बादशाह तथा प्रसिद्ध शायर था।
  • 1857 की क्रांति में विद्रोहियों का साथ देने के कारण; अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया था जहाँ 1862 में इनकी मृत्यु हो गई।
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