सौरमंडल

ब्रह्माण्ड,आकाशगंगा,सौरमंडल

Universe/Cosmos ब्रह्माण्ड

Fact on the universe galaxy and solar system in hindi.ब्रह्माण्ड का अध्ययन हम विज्ञान की शाखा Cosmology के अंतर्गत करते हैं। ब्रह्माण्ड आकाशीय पिण्डो की एक सुव्यवस्था हैं। जिसमें सभी आकाशीय पिंड एक निश्चित दूरी पर, एक निश्चित दिशा, निश्चित गति से गतिशील रहते है।

  • ब्रह्माण्ड में असंख्य संख्या में आकाश गंगाएंग्रह और उपग्रह ,उल्कापिंड इत्यादि हैं
  • ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सम्बन्ध में तीन प्रमुख सिद्धांत प्रचलित हैं-
  1. बिग बैंग सिद्धांत (महाविस्फोट सिद्धांत)–इस सिद्धांत का प्रतिपादन खगोल शास्त्री George La Maitre ने किया था जिसे बाद में Alen Guth द्वारा विकसित किया गया।
  2. सतत सृष्टि सिद्धांत:- इस सिद्धांत का प्रतिपादन Gold और  Harman Bondi ने किया था।
  3. संकुचन विमोचन का सिद्धांत (दोलन )– इस सिद्धांत का प्रतिपादन खगोल शास्त्री डॉ एलेन संडेज ने किया था।
  • ब्रहमांड में पाए जाने वाले सभी आकाशीय पिंडो का अध्ययन विज्ञान की शाखा नक्षत्रशास्त्र/खगोल शास्त्र/Astronomy में किया जाता हैं।
  • आकाशीय पिंडो का जो प्रभाव मानव जीवन पर पड्ता है उसका अध्ययन ज्योतिष विज्ञान (Astrology ) में किया जाता है।
  • आकाशीय पिंडो की भौतिक विशेषताओं का अध्ययन विज्ञान की खगोल भौतिकी (Astrophysics ) में किया जाता हैं।
  • पौलेंड के खगोलशास्त्री निकोलस कपरनिकस ने 1543 ईसूर्य केन्द्रित (Helio Centric )संकल्पना का प्रतिपादन किया था।

आकाश गंगा (Galaxy)

  • आकाशगंगा को यूनानी भाषा में galaxy कहा जाता हैं।
  • ब्रह्माण्ड में पाए जाने वाले तारों के जमाव को (पुंज ) को आकाश गंगा कहा जाता हैं।
  • हमारा सौरमंडल जिस आकाश गंगा में स्थित हैं उसे मन्दाकिनी कहा जाता हैं।
  • प्रत्येक आकाशगंगा में 100 अरब तारों का जमाव होता हैं।
  • हमारी आकाशगंगा मन्दाकिनी की आकृति सर्पिलाकार(Spiral )हैं जिसमें तीन भुजाएँ पाई जाती हैं।
  • सूर्य एक तारा हैं जो हमारी आकाशगंगा के केंद्र से 32 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थिति हैं।
  • हमारी आकाशगंगा का निकटवर्ती आकाशगंगा देवयानी (Andromeda) हैं।
  • ब्रह्माण्ड में पाई जाने वाली नवीनतम आकाशगंगा ड्वार्फ हैं।
  • पृथ्वी से दृश्यमान आकाशगंगा की चमकदार मेहराबयुक्त भुजा को ऐरावत पथ /दूधिया मेखला (Milkyway ) कहा जाता हैं।

तारा (Star)

  • तारे ब्रह्माण्ड में पाए जाने वाले चमकदार गैसों के पिंड होते हैं जिनमें अपना प्रकाश पाया जाता हैं।
  • तारों में पायें जाने वाली गैसों में सर्वाधिक 70% मात्रा हाइड्रोजन गैस की होती हैं इसके पश्चात दूसरी महत्वपूर्ण गैस (26.5 % ) हीलियम होती हैं।
  • तारों का रंग उनकी आयु का सूचक होता हैं। जिस तारे की उम्र जितनी कम होगी वह तारा उतना ही चमकदार होगा।
  • तारों में हाइड्रोजन गैस की हीलियम गैस के साथ संलयन की प्रक्रिया चलती रहती हैं।
  • सूर्य युवावस्था का पीला तारा है जिसमें हाइड्रोजन के साथ हीलियम का संलयन चल रहा हैं।
  • ध्रुव तारा (Pole Star)पृथ्वी के ध्रुव पर 90° का कोण बनाता हैं।
  • श्वेत वामन/लाल दानव तारा (White dwarf ):- जिस तारे का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के बराबर हो जाता हैं वह तारा श्वेत वामन तारे में परिवर्तित हो जाता हैं।  इसका बाह्य कवच प्रसरित होकर लुप्त हो जाता हैं तथा केंद्र अवशिष्ट रहता हैं इसी केंद्र को श्वेत वामन कहते हैं और इसमें हीलियम पाया जाता हैं।
  • नोवा-सुपर नोवा विस्फोट :-तारे के बाह्य कवच में होने वाले विस्फोट को नोवा तथा सम्पूर्ण तारे में होने वाले विस्फोट को सुपर नोवा विस्फोट कहते है।
  • सुपर नोवा विस्फोट से बिखरे न्यूट्रान युक्त तरीय पदार्थ को न्यूट्रान तारा (Neutron Star )कहते हैं।
  • प्रचक्रण या घूमते हुए न्यूट्रान तारे को पल्सर (Pulsar) कहा जाता हैं|यह प्रकाश गृह की भांति कार्य करता हैं।
  • ब्रह्मांड में बिखरे हुए अर्द्धतारीय पदार्थ क्वासर्स (Quasars ) होते हैं जिनसे रेडियों तरंगे निकलती हैं।
  • अमेरिकी भौतिक शास्त्री Johan Wheeler ने सबसे पहले Black Hole (कृष्ण विवर) का प्रयोग किया।
  • Black hole ब्रह्माण्ड में अत्यधिक घनत्व तथा अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण का क्षेत्र हैं जहाँ से प्रकाश की किरणों का परावर्तन नहीं हो पाता हैं। हमारे अन्तरिक्ष में 88 तारामंडल हैं। तारों के समूह तारामंडल को राशि (Zodiacs ) कहा जाता हैं।  जिनकी संख्या 12 हैं। – मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ  और मीन।

सौर मंडल (Solar System )

  • सूर्य तथा उसके चारों और उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण भ्रमण करने वाले ग्रहों,उपग्रहों के सम्मलित परिवार को सूर्य का परिवार या सौर मंडल कहते हैं। सौर मंडल का मुखिया सूर्य होता है जो कि स्वयं भी एक तारा हैं।
  • सौर मंडल में ग्रहों की संख्या 9 थी जो अब घटकर 8 रह गई हैं। इसमें से प्लूटो /यम/कुबेर (24 अगस्त 2006) को हटा दिया गया हैं।

सूर्य /भास्कर (Sun)

  • सूर्य आकाशगंगा मन्दाकिनी की सर्पिलाकार दूसरी भुजा पर स्थित मध्यम आकार का पीला तारा हैं।
  • सूर्य के वायुमंडल को वर्ण मंडल (Chromosphere) कहा जाता हैं| इसका रंग लाल पाया जाता है।
  • सूर्य का बाह्य भाग सूर्य मुकुट /किरीट (Corono) कहलाता हैं, जो सूर्य ग्रहण के समय द्रश्यमान आभामय क्षेत्र होता हैं।  इससे एक्स-रे -किरणें निकलती हैं।
  • पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय सूर्य किरीट से ही प्रकाश प्राप्त होता हैं।
  • सूर्य सौर मंडल का मुखिया हैं| इसमें 71% हाइड्रोजन तथा 26.3% हीलियम गैस पाई जाती हैं।
  • सूर्य का व्यास 13,92,200 किमी हैं; जो कि पृथ्वी के व्यास का 110 गुना हैं।
  • सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा हैं और पृथ्वी को सूर्यताप का 2 अरबवां भाग मिलता हैं।
  • सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 8 मिनट 16.6 सैकंड का समय लगता हैं।
  • प्रकाश की चाल 3×10 की घात 8 Km/S हैं।
  • सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की और घूमता हैं| इसका मध्य भाग 23 दिनों में तथा धुर्वीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन करता हैं।
  • सूर्य के केंद्र पर नाभकीय संलयन होता रहता हैं जो कि सूर्य की उर्जा का श्रौत हैं।
  • भविष्य में सूर्य के उर्जा देते रहने की संभावना 10 की घात 11 वर्ष हैं।
  • सूर्य पृथ्वी का निकटतम तारा है जो कि पृथ्वी से 13 करोड़ किमी दूर हैं।
  • सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर औरोरा बोरियालिस और दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा ऑस्ट्रेलिस कहते हैं।

सौर कलंक (sun spot)-

  • सौर कलंक की खोज इटली के खगोल शास्त्री गैलीलियों के द्वारा की गई।
  • सूर्य के धरातल (प्रकाश मंडल ) के ऊपर स्थित क्षेत्र जिनका तापमान औसत तापमान से 1500 °C कम पाया जाता हैं, सौर कलंक कहलाते हैं।

सौरमंडल के पिंड

  • IAU के प्राग सम्मलेन 2006 के अनुसार सौरमंडल में मौजूद पिंडों को तीन श्रेणियों में बांटा गया हैं | IAU- International Astronomical Union
  • (1)परम्परागत ग्रह:- बुद्ध, शुक्र ,पृथ्वी ,मंगल ,ब्रहस्पति ,शनि ,अरुण एवं वरुण
  • (2)बौने ग्रह :- प्लूटो ,चेरोंन, सेरस,2003 यूबी 313
  • (3)लघु सौरमंडलीय पिंड:- धूमकेतु, उपग्रह एवं एनी छोटे खगोलीय पिंड

ग्रह

  • IAU के प्राग सम्मलेन 2006 के अनुसार ग्रह वे खगोलीय पिंड हैं जो निम्न शर्तो को पूरा करते हैं।
  1. वे खगोलीय पिंड जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
  2. वे खगोलीय पिंड  जिनमें पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो ; जिससे वे गोल स्वरूप ग्रहण कर सके।
  3. उनके पास अन्य पिंडो की भीड़ -भाड़ न हो।
    • इसी परिभाषा के आधार पर यम को ग्रहो की श्रेणी से निकाल कर बौने ग्रहों के श्रेणी में रक्खा गया हैं।
    • ग्रहों को दो भागों में बांटा गया हैं-
    • (1) बुध ,शुक्र ,पृथ्वी,एवं मंगल को पार्थिव ग्रह या आंतरिक ग्रह (Terrestrial or Inner Planet) कहा जाता हैं।
    • (2) बृहस्पति ,शनि ,अरुण और वरुण को बाह्य या बृहस्पति (Outer or Jovean Planet) ग्रह कहा जाता हैं।

  • आकार के अनुसार ग्रहो का घटता हुआ क्रम निम्नानुसार हैं -बृहस्पति( Jupiter)> शनि (Saturn)> अरुण(Uranus) > वरुण(Neptune) > पृथ्वी(Earth)> शुक्र(Venus) > मंगल(Mars) > बुध(Mercury)
  • परिभ्रमण काल के अनुसार ग्रहों (बढ़ता हुआ )क्रम- बृहस्पति, शनि, वरुण, अरुण, पृथ्वी, मंगल, बुद्ध और शुक्र
  • सूर्य से दूरी के अनुसार (घटता हुआ) क्रम– बुद्ध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण
  • ग्रहों का परिक्रमण काल ( बढ़ते हुए )क्रम में –बुद्ध,  शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण
  • घनत्व के अनुसार क्रम( बढ़ता हुआ)- शनि, अरुण, बृहस्पति, वरुण, मंगल और शुक्र
  • मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये पांच ग्रह नंगी आँखों से देखे जा सकते हैं।
  • केवल शुक्र और अरुण को छोड़कर सभी ग्रहों का घूर्णन की दिशा पश्चिम से पूर्व (Anticlock wise) हैं जबकि शुक्र और अरुण की Clock wise हैं।

  • ग्रह सूर्य से निकले हुए वे भाग होते हैं जिन्हें पिंड कहते है; ये सूर्य की परिक्रमा लगाते है तथा सूर्य से प्रकाश व ऊष्मा लेकर स्वयं को प्रकाशवान रखते हैं।
  • Planet एक ग्रीक शब्द हैं जिसका अर्थ हैं घुम्मक्कड। इसलिए ग्रहो की सबसे बड़ी विशेषता उनका गतिशील होना हैं।

बुद्ध (Mercury)

  • सूर्य के सबसे निकट व आकार में सबसे छोटा हैं।
  • सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में करता हैं इसलिए इस सौर मंडल का सबसे तेज कक्षीय गति वाला ग्रह।
  • इस पर कोई वायु मंडल नहीं पाया जाता हैं।
  • इसका कोई उपग्रह नहीं हैं।
  • यह एक चुम्बकीय क्षेत्र वाला ग्रह हैं।
  • सूर्य के सबसे निकट होने के कारण यह सूर्य निकलने के दो घंटे पहले दिखाई देता हैं।

शुक्र (Venus)

  • यह ग्रह पृथ्वी के सबसे निकटतम व सबसे चमकीला और सबसे गर्म ग्रह हैं।
  • यह आकार और घनत्व में पृथ्वी के समान हैं।
  • इस ग्रह का कोई उपग्रह नहीं हैं।
  • इस ग्रह पर ग्रीन हॉउस गैस 97% हैं।
  • इसे भोर का तारासांझ का तारासुन्दरता के देवी और पृथ्वी की बहिन आदि उपनामों से भी पुकारा जाता हैं।
  • यह सुबह के समय पूरब में तथा शाम के समय में पश्चिम दिशा में दिखाई देता हैं।
  • यह अन्य ग्रहों की विपरीत दक्षिणावर्त (Clock wise) चक्रण करता हैं।

बृहस्पति (Jupiter)

  • यह सौर मंडल का सबसे बड़ा और सबसे भारी ग्रह हैं।
  • इसके द्रव्यमान का अधिकांश भाग हाइड्रोजन और हीलियम है तथा इस ग्रह पर एक विशाल गड्ढा हैं जिससे आग की लपटें निकलती रहती हैं।
  • इसे अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में सबसे कम समय (10 घंटे) लगता हैं; जबकि सूर्य के चारों और परिक्रमा करने में 11 वर्ष 315 दिन और 1 घंटे का समय लगता हैं।
  • इसके कुल 67 उपग्रह हैं जिनमें सबसे बड़ा उपग्रह गैनीमीड हैं।
  • इस ग्रह से रेडियों की तरंगे प्रसारित होती रहती हैं।
  • वोयेजर नामक अन्तरिक्ष यान का सम्बन्ध इसी ग्रह से हैं।

मंगल (Mars)

  • आयरन ऑक्साइड के कारण इस ग्रह का रंग लाल हैं।  इसीलिए इस ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता हैं।
  • यह ग्रह भी अपने अक्ष पर पृथ्वी की समान झुका हैं। इसीलिए इस ग्रह पर भी पृथ्वी के समान मौसम परिवर्तन होते रहते हैं।
  • यह ग्रह भी अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता हैं।
  • सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते हैं।
  • इसके वायुमंडल में 95% कार्बन डाई ऑक्साइड, 2.3 % नाइट्रोजन, तथा 2% आर्गन हैं।
  • इसके दो उपग्रह हैं – फोबोस और डीमोस
  • सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिपस मैसी तथा सौर मंडल का सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलंपिया भी इसी ग्रह पर हैं; जिसकी ऊंचाई माउन्ट एवेरेस्ट से तीन गुना हैं।

शनि (Saturn)

  • यह काले रंग का ग्रह हैं इसे लाल दानव कहते हैं। शनि सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह हैं।
  • इसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में 29.456 वर्ष लगते हैं।
  • शनि के 62 उपग्रह हैं जिनमें से टाइटन नामक उपग्रह सबसे बड़ा हैं।
  • टाइटन की खोज 1665 ई. में क्रिश्चियन हाईजोन ने की थी; यह एक मात्र ऐसा उपग्रह हैं जिसका पृथ्वी जैसा स्वयं का सघन वायुमंडल हैं।
  • शनि एक एक ओर उपग्रह फ़ोबे हो इसकी कक्षा में घूमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता हैं।
  • इस ग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसके 7 वलय हैं यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई पड़ता हैं।
  • इसका घनत्व सभी ग्रहों में सबसे कम है यहाँ तक कि जल से भी कम हैं।

अरुण (Uranus)

  • यह ग्रह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ हैं कि लेटा हुआ सा दिखाई पड़ता हैं; इसीलिए इसे लेटा हुआ ग्रह भी कहते हैं।
  • इस ग्रह की खोज 1781 ई. में विलियम हर्शेल द्वारा की गई थी।
  • यह शुक्र के समान दक्षिणावर्त (पं० से पू0) की और घुमता हैं जबकि अन्य सभी वामावर्त घूमते हैं।
  • यह 84 वर्षो में सूर्य की परिक्रमा करता हैं।
  • इसके 27 उपग्रह हैं जिसमे सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया हैं।

वरुण (Neptune)

  • इस ग्रह की खोज 1846 ई० में जोहान गाले ने की थी।
  • मीथेन होने के कारण यह ग्रह हरे रंग का दिखाई देता हैं।
  • वर्तमान में इसके 14 उपग्रह हैं; जिनमें से ट्राइटन तथा नेरिड प्रमुख हैं।

पृथ्वी (Earth)

  • आकार में 5 वां सबसे बड़ा ग्रह (नीला) हैं।
  • इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा (पृथ्वी का भाई) हैं।
  • पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 1/2 ° झुकी हई हैं।
  • पृथ्वी का विषुवत धुर्वीय व्यास 12,756 किमी तथा धुर्वीय व्यास 12,714 किमी. हैं।
  • पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड में लगाती हैं।
  • पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घुमती हैं।
  • पृथ्वी पर ऋतू परिवर्तन पृथ्वी के अपने अक्ष पर झुके होने के कारण होते हैं।
  • पृथ्वी की घूर्णन गति 1610 किमी /घंटा हैं ; इसी के कारण दिन-रात होते हैं।
  • भूमध्य रेखा पर दिन और रात समान होते हैं।
  • पृथ्वी की सूर्य के निकटम दूरी 3 जनवरी को जिसे उपसौर कहते हैं तथा सूर्य से अधिकतम दूरी 4 जुलाई को होती है जिसे अपसौर कहते हैं।
  • सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकटम तारा प्रोक्सिमा सेंचुरी हैं।
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